सारंगढ़

रेबीज से बचाव का सबसे बड़ा हथियार तुरंत घाव धोएं और टीका लगवाएं…

सारंगढ़। विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर सीएमएचओ डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव ने रेबीज को लेकर लोगों को महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए सतर्कता बरतने की अपील की। उन्होंने बताया कि रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित पशु की लार के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। एक बार बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद यह लगभग हमेशा जानलेवा होती है। इसलिए पशु के काटने के बाद तत्काल उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।
डॉ. वैष्णव ने बताया कि दुनिया में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मौत रेबीज से होती है और इनमें अधिकांश मामले कुत्ते के काटने से जुड़े हैं। भारत में भी कुत्तों के काटने के मामले रेबीज संक्रमण का प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि पालतू होने मात्र से कुत्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता, इसलिए पालतू कुत्ते-बिल्ली का नियमित टीकाकरण जरूरी है।
उन्होंने रेबीज संक्रमित कुत्ते के व्यवहार को लेकर भी लोगों को जागरूक किया। बिना कारण आक्रामक होना, अपने मालिक को काटना, लगातार भटकना या असामान्य रूप से भौंकना, मुंह से अत्यधिक लार आना तथा पानी, हवा या रोशनी से असामान्य प्रतिक्रिया जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ संक्रमित कुत्तों में इसके विपरीत शांत या ‘गूंगा’ रूप भी देखने को मिलता है, जिसमें कुत्ता एकांत में छिपा रहता है, जबड़ा लटक सकता है और लार टपक सकती है। इसलिए केवल भौंकने वाले कुत्ते को ही रेबीज से संक्रमित मानना गलत है।

कुत्ते के काटने पर ये गलती बिल्कुल न करें

सीएमएचओ ने कहा कि कुत्ते या किसी संदिग्ध पशु के काटने पर घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। घाव पर मिर्च, चूना, राख, गोबर, मिट्टी या अन्य घरेलू पदार्थ बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर चिकित्सकीय सलाह और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन की निर्धारित खुराक पूरी करना बेहद जरूरी है। गंभीर यानी कैटेगरी-3 एक्सपोजर में चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी घाव के आसपास दिया जाता है। बीच में टीकाकरण छोड़ देना जानलेवा साबित हो सकता है।

बच्चों को सिखाएं अनजान कुत्तों से रहें दूर

डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को अनजान कुत्तों के पास जाने, उन्हें छेड़ने या खाना खिलाते समय उनके करीब जाने से बचने की सीख दें। उन्होंने कहा कि पालतू कुत्ते-बिल्ली का नियमित टीकाकरण कराया जाए और पशु जन्म नियंत्रण (ABC), टीकाकरण तथा जनजागरूकता को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाए।
उन्होंने लोगों से स्पष्ट संदेश दिया “पशु के काटने पर घबराएं नहीं, समय बर्बाद न करें। घाव को तुरंत धोएं, चिकित्सकीय सलाह लें और टीकाकरण का पूरा कोर्स करें। जागरूकता और समय पर उपचार से रेबीज से होने वाली मौत को रोका जा सकता है।”

Back to top button