हल्का नंबर 45 में पटवारी की मनमानी चरम पर..मुख्यालय से पटवारी नदारद, नामांतरण और सीमांकन के लिए चप्पलें घिस रहे किसान..‘सेवा संकल्प शिविर’ में फूटेगा जनता का गुस्सा!

सारंगढ़-बिलाईगढ़:
शासन-प्रशासन भले ही जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के हल्का नंबर 45 में हकीकत इसके उलट है। यहां पदस्थ पटवारी मुकेश जोल्हे की कथित कार्यप्रणाली से त्रस्त ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। आरोप है कि पटवारी साहब गांव और मुख्यालय से लगातार नदारद रहते हैं, जिसके चलते गरीब किसान और ग्रामीण अपने ही काम के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। अब इस तानाशाही के खिलाफ ग्रामीण आर-पार के मूड में हैं और ‘सेवा संकल्प अभियान’ में मोर्चा खोलने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।
भगवान भरोसे हल्का नंबर 45-
फर्सवानी और आसपास के ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पटवारी कब आते हैं, कब जाते हैं और कहां बैठते हैं यह किसी पहेली से कम नहीं है।
नामांतरण, बंटवारा, खसरा नकल, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल गिरदावरी और सीमांकन जैसे जरूरी कामों के लिए लोग रोजाना पटवारी दफ्तर पहुंचते हैं, लेकिन वहां ताला लटका मिलता है।
मुख्यालय नियम की धज्जियां-
शासन का सख्त निर्देश है कि पटवारी अपने निर्धारित मुख्यालय में रहकर तय दिनों में जनता की समस्याएं सुलझाएं, लेकिन हल्का नंबर 45 में यह नियम फाइलों में कैद होकर रह गया है।
”ग्रामीणों का कहना है कि पटवारी से मिलना किसी बड़े अफसर से मिलने से ज्यादा मुश्किल हो गया है। एक हस्ताक्षर के लिए हफ्तों चक्कर कटवाए जा रहे हैं।”
सेवा संकल्प अभियान में शिकायत कि तैयारी-
पटवारी की कार्यशैली से आजिज आ चुके ग्रामीणों ने अब चुप बैठने के बजाय आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आगामी ‘सेवा संकल्प अभियान’ में उच्चाधिकारियों के सामने पटवारी मुकेश जोल्हे के खिलाफ साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
ग्रामीणों की दो टूक मांग है कि केवल औपचारिकता निभाकर मामले को रफा-दफा न किया जाए। पटवारी के मुख्यालय में उपस्थिति रजिस्टर और मोबाइल लोकेशन की निष्पक्ष जांच हो।
महीनों से लंबित पड़े राजस्व मामलों की स्क्रूटनी की जाए कि जनता के काम क्यों अटके हैं।
क्या हल्का नंबर 45 के पटवारी नियमों से ऊपर हैं, जो मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना जरूरी नहीं समझते?
क्या ग्रामीणों से मिलने का कोई दिन और समय तय है, या सब कुछ पटवारी की मर्जी पर निर्भर है?
क्या राजस्व विभाग के आला अधिकारी फील्ड में उतरकर कभी औचक निरीक्षण की जहमत उठाते हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मंशा किसी कर्मचारी से व्यक्तिगत रंजिश की नहीं, बल्कि अपने जायज हक और पारदर्शी व्यवस्था की है। अब देखना यह है कि सेवा संकल्प अभियान में गूंजने वाली इस आवाज पर प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागकर कोई ठोस कार्रवाई करता है, या फिर जांच के नाम पर हमेशा की तरह लीपापोती कर दी जाएगी।
क्या कहते हैं पटवारी-
इस संबंध में पटवारी मुकेश जोल्हे का पक्ष जानने के लिए उन्हें व्हाट्सऐप के माध्यम से संदेश भेजकर मामले में लगे आरोपों पर उनका पक्ष पूछा गया। साथ ही फोन के माध्यम से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब अथवा प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। पटवारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।