गांव माटी की खुशबू से मॉस्को तक का सफर..डोमाडीह की बेटी सत्यभामा बनेगी डॉक्टर..रूस के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में हुआ चयन..

सारंगढ़। जब इरादे फौलादी हों और मन में कुछ कर गुजरने का अटूट जज्बा, तो संसाधनों का अभाव भी राह का रोड़ा नहीं बन सकता। इसे सच कर दिखाया है सारंगढ़ अंचल के एक छोटे से सुदूर गांव डोमाडीह पोस्ट-मल्दा की होनहार बेटी सत्यभामा चौहान ने। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी सत्यभामा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए विदेश में प्रतिष्ठित एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए चयन हासिल कर पूरे क्षेत्र का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। सत्यभामा का दाखिला रूस स्थित विश्वप्रसिद्ध नॉर्दर्न स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए हुआ है।
सीमित सुविधाओं और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बीच सत्यभामा ने बचपन से ही डॉक्टर बनकर समाज सेवा करने का सपना संजोया था। निरंतर कठिन परिश्रम, अनुशासित दिनचर्या और अटूट आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने वह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया, जो आज क्षेत्र की हर उस बेटी और युवा के लिए मिसाल बन गया है जो बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
सत्यभामा के इस ऐतिहासिक चयन की खबर मिलते ही उनके पिता श्री मोहत्साह चौहान और माता श्रीमती पुष्पा चौहान की आंखें खुशी से छलक उठीं। भावुक माता-पिता ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि बेटी ने न सिर्फ परिवार का मान बढ़ाया है, बल्कि यह साबित कर दिया है कि अगर बेटियों को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे पूरी दुनिया में अपनी कामयाबी का परचम लहरा सकती हैं।
अपनी इस अभूतपूर्व सफलता पर सत्यभामा चौहान ने कहा कि यह मुकाम केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के विश्वास की जीत है जो हर मोड़ पर उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के निस्वार्थ त्याग, मित्र दुर्गेश मालाकार, बड़ी दीदी दीपा राजहंस, माँ संतोष चौहान, दादाजी, नाना-नानी, मामा-मामी सहित समस्त पारिवारिक सदस्यों के सतत मार्गदर्शन व स्नेह को दिया।
जैसे ही सत्यभामा के विदेश में एमबीबीएस चयन का समाचार क्षेत्र में फैला, डोमाडीह स्थित उनके निवास पर बधाई और शुभकामनाएं देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ प्रबुद्धजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। सभी ने एक स्वर में प्रार्थना की कि सत्यभामा विदेश में उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर एक सफल व संवेदनशील चिकित्सक के रूप में वापस लौटें और अपने अंचल व देश की निस्वार्थ सेवा करें।