सारंगढ़

खबर का असर : मुड़पार छोटे चेक डैम धांधली की होगी उच्चस्तरीय जांच..

​सारंगढ़-बिलाईगढ़: ग्रामीण अंचलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जब कलम उठती है, तो सत्ता के गलियारों में हलचल होना लाजिमी है। कुछ ऐसा ही नजारा सारंगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मुड़पार छोटे में देखने को मिला है। यहाँ मनरेगा के तहत बन रहे चेक डैम में बरती जा रही अनियमितता को लेकर प्रकाशित समाचार का बड़ा असर हुआ है।

खबर का दमदार असर-

​विगत दिनों सारंगढ़ के मीडिया प्लेटफॉर्म खोजी पत्रकारों द्वारा प्रमुखता से एक खबर प्रकाशित की गई थी। इसमें खुलासा किया गया था कि लगभग 14 लाख 67 हजार रुपये की लागत से बन रहे चेक डैम निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। गुणवत्ता को ताक पर रखकर सीमेंट और कंक्रीट के स्थान पर ‘बजरी और डस्ट’ का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा था।

सीईओ ने जारी किए जांच के आदेश-

​पत्रकारिता की इस सजगता को संज्ञान में लेते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत सारंगढ़ ने कड़ा रुख अपनाया है। जारी किए गए आधिकारिक पत्र (क्रमांक 810/ज.पं./MGNREGA/2025-26) के अनुसार
​जांच टीम गठित की है जिसमें अनुविभागीय अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को मामले की गहन जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
सबसे अहम बात प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच प्रतिवेदन 03 दिवस के भीतर कार्यालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

तकनीकी सहायक की भूमिका संदिग्ध-

पत्र में स्पष्ट रूप से ‘तकनीकी सहायक के संरक्षण में हो रही धांधली’ का उल्लेख है, जो सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

क्या दोषियों पर होगी कार्रवाई?

​यह खबर न केवल भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करती है, बल्कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जीत भी है। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें जांच टीम पर टिकी हैं।

बड़ा सवाल-

क्या 3 दिनों के भीतर होने वाली यह जांच दूध का दूध और पानी का पानी कर पाएगी? क्या भ्रष्टाचार में डूबे तकनीकी सहायकों और ठेकेदारों पर गाज गिरेगी, या फिर जांच की फाइलें रसूख के नीचे दबकर रह जाएंगी?
यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शिता बरतता है। फिलहाल, ‘मीडिया ‘ की इस मुहिम ने भ्रष्टाचारियों की नींद जरूर उड़ा दी है।

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