सारंगढ़

एनीमिया के खिलाफ सतत अभियान जरूरी, जांच और जागरूकता से बच सकती हैं जिंदगियां…

सारंगढ़-बिलाईगढ़। महिलाओं और बच्चों को एनीमिया से मुक्त करने के लिए लगातार जांच, उपचार और जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार एनीमिया मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है। गर्भवती महिलाओं के साथ 6 माह से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोर-किशोरियों की नियमित जांच कर एनीमिक लोगों की पहचान और समय पर उपचार किया जाना आवश्यक है।
एनीमिया की स्थिति में शरीर की कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके प्रमुख लक्षणों में चक्कर आना, जल्दी थक जाना, चलने या दौड़ने पर सांस फूलना, भूख कम लगना, पढ़ाई में मन न लगना और चेहरा पीला पड़ना शामिल हैं। डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से इसकी जांच सरलता से की जा सकती है।
NFHS-5 के अनुसार 6 माह से 5 वर्ष तक के 67.2 प्रतिशत बच्चे, 6 से 10 वर्ष के करीब 50 प्रतिशत बच्चे, 10 से 19 वर्ष की 63.4 प्रतिशत किशोरियां और करीब 60 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। गत वर्ष सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के आश्रम एवं कन्या छात्रावासों में हुई जांच में 70 प्रतिशत से अधिक बालिकाएं एनीमिक मिली थीं। इनमें चार बालिकाओं का हीमोग्लोबिन 4 ग्राम प्रतिशत से भी कम पाया गया, जिन्हें जिला अस्पताल में रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ी।
एनीमिया का असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। इससे बच्चों की सीखने-समझने की क्षमता, एकाग्रता और शारीरिक-मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है तथा स्कूल में अनुपस्थिति भी बढ़ सकती है। इसलिए बचाव को ही सबसे प्रभावी उपाय माना गया है।
संतुलित और पौष्टिक आहार, स्वच्छता, नियमित कृमिनाशक दवा, सिकल सेल की जांच तथा आयरन-फोलिक एसिड की निर्धारित खुराक का सेवन एनीमिया की रोकथाम में महत्वपूर्ण है। 6 माह से 5 वर्ष तक बच्चों को निर्धारित मात्रा में IFA सिरप, 6 से 10 वर्ष के बच्चों को गुलाबी WIFS गोली तथा 10 से 19 वर्ष की किशोरियों को नीली WIFS गोली देने और उसका रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
एनीमिया के प्रति जागरूकता एक बार के अभियान से नहीं बल्कि निरंतर प्रयासों से बढ़ेगी। आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों को इसके लिए महत्वपूर्ण माध्यम बनाते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
इसी कड़ी में गत दिवस पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एफ.आर. निराला ने पेंड्रावन स्थित एक निजी शाला में बालिकाओं को एनीमिया के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने नियमित जांच, पौष्टिक आहार और आयरन की खुराक के महत्व को समझाया। कार्यक्रम में शाला के शिक्षक-शिक्षिकाएं, संकुल समन्वयक एवं संजीव राजेत्री सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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