कनकबीरा चौकी के नवीन भवन को संवारने वाले प्रभारी टीकाराम खटकर का सरिया तबादला..उद्घाटन का नहीं मिला अवसर, पर जनता के दिलों में बनाई अमिट पहचान..

सारंगढ़ :
प्रशासनिक सेवा में तबादले एक सामान्य प्रक्रिया हैं, लेकिन कुछ अधिकारी अपने कार्यकाल में ऐसा काम कर जाते हैं कि उनका जाना पूरे क्षेत्र को भावुक कर देता है। कनकबीरा पुलिस चौकी में पदस्थ रहे लोकप्रिय चौकी प्रभारी टीकाराम खटकर का सरिया स्थानांतरण होने पर क्षेत्र में कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है। कनकबीरा की जनता उनके स्थानांतरण से भावुक तो है ही, साथ ही उस दर्द को भी महसूस कर रही है कि जिस नवीन चौकी भवन को उन्होंने अपने पसीने से खड़ा किया, उसके उद्घाटन का अवसर उन्हें नहीं मिल सका।
कनकबीरा में पुलिस चौकी के नवीन भवन का निर्माण कार्य जब शुरू हुआ, तब टीकाराम खटकर ने इसे महज एक सरकारी ड्यूटी नहीं माना। उन्होंने एक अभिभावक की तरह दिन-रात खड़े रहकर निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करवाया। इतना ही नहीं, भवन को बेहतर, औऱ मजबूत बनाने के लिए कई दफा खुद पानी सिंचते देखे गये। वर्दी के पीछे छिपी उनकी इस संवेदनशीलता और आत्मीयता ने पूरे कनकबीरा क्षेत्र का दिल जीत लिया था।
बड़ी विडंबना यह रही कि जिस इमारत की नींव से लेकर छत तक टीकाराम खटकर का समर्पण और त्याग जुड़ा रहा, जब उसके पूर्ण होने और उद्घाटन की घड़ी नजदीक आई, तभी प्रशासनिक आदेश के तहत उनका स्थानांतरण सरिया हो गया। उन्हें अपनी ही मेहनत से तैयार भवन के औपचारिक लोकार्पण का साक्षी बनने का मौका नहीं मिला।
कनकबीरा क्षेत्र के नागरिकों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि फीता काटने या शिलापट्ट पर नाम लिखाने से कोई बड़ा नहीं होता। कनकबीरा चौकी का यह नया भवन सिर्फ ईंट-सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि टीकाराम खटकर की कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा का जीवंत प्रतीक है। सरिया रवानगी के मौके पर क्षेत्रवासियों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए कहा कि पुलिसिंग के साथ-साथ क्षेत्र के प्रति उनका यह निस्वार्थ योगदान कनकबीरा की धरती पर सदैव आदर और सम्मान के साथ याद किया जाएगा।