सारंगढ़

जनपद सीईओ पर आरोप पूरी तरह बेबुनियाद..72 लाख की गड़बड़ी रोकने पर तिलमिलाए असामाजिक तत्व..

​सारंगढ़: जनपद पंचायत सारंगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पर लगाए गए तमाम आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत करार दिया गया है। असल में यह पूरी कवायद वित्तीय अनुशासन का कड़ाई से पालन कराने और शासकीय धन के दुरुपयोग को रोकने वाले एक ईमानदार एवं सख्त अधिकारी की छवि को धूमिल करने की नीयत से की जा रही है।

वित्तीय अनियमितता पर कड़ा प्रहार-

शासकीय अभिलेखों के अनुसार, जनपद सीईओ ने गौण खनिज मद के तहत ग्राम पंचायत खर्री बड़े (₹29,24,500), अमलीपाली ब (₹30,00,000) और जसरा (₹13,31,892) के खातों में अंतरित कुल ₹72,56,392 की शासकीय राशि के आहरण पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने एसबीआई सारंगढ़ के शाखा प्रबंधक को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिया कि जनपद कार्यालय की अनुमति के बिना इस राशि का आहरण न होने दिया जाए।

कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर-

सीईओ का रुख पूरी तरह से शासकीय नियमों के अनुकूल है। उनका स्पष्ट आदेश है कि विकास कार्यों की भौतिक प्रगति और नियमों का सत्यापन होने के बाद ही धनराशि जारी की जाएगी। बिना काम किए या नियम विरुद्ध तरीके से राशि निकालने के मंसूबों पर पानी फिरने के कारण ही हितबद्ध तत्व बौखलाहट में अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।

निष्पक्ष और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की पहचान-

जनपद में सीईओ की पहचान एक नियमबद्ध, पारदर्शी और विकास कार्यों को प्राथमिकता देने वाले सहृदय अधिकारी के रूप में होती है। जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के कारण उन्हें क्षेत्र की जनता और निष्पक्ष जनप्रतिनिधियों का भारी समर्थन हासिल है।

ऑन-रिकॉर्ड पत्राचार से दूध का दूध और पानी का पानी-

सीईओ ने शासकीय प्रक्रिया के तहत कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ को पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए पत्राचार किया है। ऑन-रिकॉर्ड कागजी प्रमाणों के सामने आते ही विरोधियों द्वारा गढ़े गए झूठे आरोपों की हवा निकल गई है। स्थानीय नागरिकों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने शासकीय कोष की सुरक्षा करने वाले सीईओ के इस कदम की खुलकर प्रशंसा की है।

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