अंधेरे से उजाले तक: जेएसएम अस्पताल ने नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन से बुजुर्ग की लौटाई रोशनी…

सारंगढ़। सारंगढ़ के जेएसएम (JSM) अस्पताल ने एक बार फिर मानव सेवा की मिसाल पेश करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्ग मरीज की आंखों की रोशनी वापस लौटाई है। उलखर निवासी एक बुजुर्ग, जो लंबे समय से एडवांस मोतियाबिंद (कैटरैक्ट) की समस्या से जूझ रहे थे, उनका अस्पताल में पूरी तरह नि:शुल्क सफल ऑपरेशन किया गया। इस सफल सर्जरी के बाद मरीज की दृष्टि में सुधार हुआ और उनके चेहरे पर दोबारा मुस्कान लौट आई।
जानकारी के अनुसार, मरीज की आंखों में मोतियाबिंद इतना बढ़ चुका था कि उन्हें दैनिक कार्य करने में भी गंभीर परेशानी हो रही थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने में असमर्थ थे। स्वास्थ्य जांच के दौरान उनकी स्थिति सामने आने पर उन्हें तत्काल जेएसएम अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पी. आर. कुर्रे ने मानवीय आधार पर उनका संपूर्ण उपचार एवं सफल ऑपरेशन पूरी तरह नि:शुल्क किया।
आधुनिक तकनीक से सफल सर्जरी
जेएसएम अस्पताल के अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर में वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पी. आर. कुर्रे के नेतृत्व में आधुनिक एवं सुरक्षित तकनीक के माध्यम से मोतियाबिंद की सफल सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की नियमित निगरानी की गई और स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें आवश्यक दवाइयों, सुरक्षा चश्मे तथा जरूरी चिकित्सकीय सलाह के साथ डिस्चार्ज किया गया।
फॉलो-अप जांच के दौरान मरीज ने भावुक होकर कहा कि उन्हें लगा था कि पैसों की कमी के कारण अब जिंदगी भर अंधेरे में रहना पड़ेगा, लेकिन जेएसएम अस्पताल के डॉक्टरों और पूरी टीम ने बिना कोई शुल्क लिए उन्हें फिर से दुनिया देखने की खुशी दी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन तथा डॉ. पी. आर. कुर्रे सहित पूरी चिकित्सा टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के प्रति समर्पित जेएसएम अस्पताल
अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पी. आर. कुर्रे ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मोतियाबिंद की समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है। बुजुर्गों में यह अंधेपन का प्रमुख कारण है, लेकिन समय रहते सर्जरी कराकर इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए नि:शुल्क एवं रियायती उपचार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि किसी भी व्यक्ति का इलाज केवल पैसों की कमी के कारण प्रभावित न हो।