छातादेई पंचायत मे पूर्व सरपंच ने सरकारी तिजोरी को बनाया था ‘पारिवारिक खजाना’!पत्नी के खाते में डाला पंचायत का फंड, जांच बैठते ही खुली भ्रष्टाचार की पोल..

सारंगढ़-बिलाईगढ़:
कहते हैं कि “घर की बात घर में ही रहे तो बेहतर होती है,” लेकिन सारंगढ़ के ग्राम पंचायत छातादेई के तत्कालीन सरपंच साहब ने इस कहावत को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया! गाँव के विकास के लिए आई सरकारी राशि को बाहर किसी अनजान वेंडर को देने के बजाय उन्होंने अपनी ही अर्धांगिनी को कागजों पर ‘वेंडर’ घोषित कर दिया। फिर क्या था, सरकारी खजाने से निकला पैसा सीधे गृहलक्ष्मी के खाते में समा गया। इसे कहते हैं तत्कालीन सरपंच विजय विक्की पटेल का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का घरेलू मॉडल!
लेकिन अफ़सोस, सरपंच जी का यह पारिवारिक वित्तीय प्रबंधन ज्यादा दिनों तक छिप न सका। ‘पाप का घड़ा’ भरते ही जब जांच की आंच पहुँची, तो अब 3 लाख 14 हजार रुपये की रिकवरी का फरमान जारी हो चुका है।
जनदर्शन से खुली पोल-
पूरा मामला जनपद पंचायत सारंगढ़ का है। गाँव के ही जागरूक नागरिक रमेश कुमार ने जब ‘जनदर्शन’ की चौखट पर जाकर सरपंच विजय (विक्की) पटेल के इस अनूठे घरेलु सेवा भाव शिकायत दर्ज कराई, तो प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई।
मामले को संगीन मानते हुए 19 जनवरी 2026 को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई। जांच दल ने जब मटीरियल रजिस्टर, पेमेंट ऑर्डर और ऑनलाइन रिपोर्टों की परतें खंगालीं, तो आँखें फटी की फटी रह गईं। ‘छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993’ के नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए सरपंच साहब ने अपनी पत्नी को ही फर्जी वेंडर बनाकर सरकारी रकम का धड़ल्ले से आहरण कर लिया था।
ऐसे होगी वसूली –
जांच में 3,14,000 रुपये के इस फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही जिला पंचायत सीईओ ने कड़ा रुख अपनाया है। अब इस ‘पार्टनरशिप’ में फर्जीवाड़ा करने वालों के बीच बही-खाता भी बराबर बाँट दिया गया है अर्थात तत्कालीन सचिव विरेंद्र सिदार, जिन्होंने इस पूरे खेल में मौन सहमति दी थी, उनसे ₹1,57,000 की राशि उनके हर महीने मिलने वाले वेतन से काटकर वसूली जाएगी।
औऱ तत्कालीन सरपंच विजय (विक्की) पटेल से बाकी के ₹1,57,000 वसूलने के लिए एसडीएम सारंगढ़ को धारा 92 के तहत प्रकरण दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं।
सरकारी खजाने को अपनी निजी तिजोरी समझने का यह अजीबोगरीब मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिला पंचायत की इस सख्त कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि पंचायत के फंड से अपनी ‘घरेलू तिजोरी’ भरने वालों का अंजाम अब सलाखों या कड़े जुर्माने तक ही जाएगा!
