सारंगढ़

कांग्रेस के विधायक होने की सजा भुगत रहा सारंगढ़ – अरुण मालाकार बजट में जिले के साथ हुआ सौतेला व्यवहार..खोखले दावे और जमीनी हकीकत से दूर ‘साय सरकार’…

​सारंगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर विपक्षी खेमे ने तीखा हमला बोला है। जिला कांग्रेस कमेटी (जिकांक) के पूर्व अध्यक्ष अरुण मालाकार ने साय सरकार के बजट को ‘उद्योगपति हितैषी’ और ‘जनता विरोधी’ करार देते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की है। मालाकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बजट आम आदमी, किसानों और पिछड़े जिलों की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेरने वाला है।

उद्योगपतियों की ‘चाकरी’ और गरीबों की ‘अनदेखी’-

अरुण मालाकार ने बजट का विश्लेषण करते हुए कहा कि सरकार ने चतुराई से असली आंकड़ों को छिपाकर केवल बड़े कॉर्पोरेट घरानों को खुश करने की नीति अपनाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बस्तर और सरगुजा के विकास के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत में आदिवासी, किसान और ग्रामीण अंचलों की मूलभूत समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।

शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल-

शिक्षा के गिरते स्तर पर हमला बोलते हुए मालाकार ने कहा, “पिछले बजट की छात्रवृत्ति का एक पैसा भी छात्रों को नहीं मिला। प्रदेश में 60 हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार नई भर्तियों को जानबूझकर रोक कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।” उन्होंने आगे जोड़ा कि प्रदेश के 10,463 स्कूल बंद कर दिए गए हैं और कांग्रेस शासन में शुरू हुए स्वामी आत्मानंद स्कूल उपेक्षा के कारण बदहाली के आंसू रो रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अस्पतालों में दवा और इलाज का अभाव है और आयुष्मान योजना का भुगतान रुकने से मरीजों को निजी अस्पतालों में भटकना पड़ रहा है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार
जिले की उपेक्षा पर नाराजगी जाहिर करते हुए मालाकार ने कहा कि साय सरकार ने इस बजट में सारंगढ़-बिलाईगढ़ को फिर से ‘झुनझुना’ थमा दिया है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि चूंकि इस जिले के दोनों विधायक कांग्रेस से हैं, इसलिए भाजपा सरकार द्वेष की राजनीति करते हुए इस क्षेत्र का विकास रोकना चाहती है।

मालाकार के अनुसार –

“यह बजट विजन डॉक्यूमेंट नहीं, बल्कि आंकड़ों की बाजीगरी है। साय सरकार की नीतियां केवल अमीरों को लाभ पहुँचाने के लिए बनी हैं, आम आदमी के लिए इसमें केवल निराशा है।”

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