सारंगढ़

दहिदा के नन्हे हाथों से बने गोबर के दीये जगमगाएंगे जवानों की दीपावली…

 

सारंगढ़। दीपावली के पावन पर्व पर सारंगढ़ के नन्हे बच्चों के हाथों से तैयार किए गए पर्यावरण अनुकूल गोबर के दीये देश की सीमाओं पर तैनात वीर जवानों के घर-आंगन को रोशन करेंगे। शासकीय प्राथमिक शाला दहिदा के बच्चों ने देश के सैनिकों के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए यह अनूठी पहल की है। बच्चों की इस पहल ने शिक्षा के साथ राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सरोकारों की एक खूबसूरत मिसाल पेश की है।

विद्यालय की प्रधान पाठक प्रियंका गोस्वामी, जो राज्यपाल पुरस्कार एवं राज्य स्मृति शिक्षक सम्मान से सम्मानित हैं, के नेतृत्व में बच्चों ने इको-फ्रेंडली गोबर के दीये तैयार किए हैं। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। विद्यालय में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी, आपसी भाईचारे और राष्ट्रप्रेम का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है।

इस पुनीत कार्य में शिक्षक संजय मिश्रा, असरिता टोप्पो, खेमराज पटेल, गांव की महिलाओं, पूर्व छात्राओं नम्रता खूंटे, प्रतिभा भारती एवं हीना आदित्य ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं सरपंच सहसराम जांगड़े, शाला प्रबंध समिति अध्यक्ष गुहाराम भारद्वाज, बिहान समूह की महिलाएं कौशल्या यादव, अनुराधा जांगड़े, शांति बंजारे एवं कल्पना भारती सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका मितानिन, रसोइया ललिता सिदार और सफाईकर्मी बुधराम भारती ने भी उत्साहपूर्वक सहयोग किया। खेती-किसानी के व्यस्त समय के बावजूद गांव की महिलाओं ने समय निकालकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा और सामुदायिक एकजुटता का परिचय दिया।

प्रधान पाठक प्रियंका गोस्वामी द्वारा तैयार कराए गए दीये जिले की कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू एवं जिला पंचायत सीईओ ऋषिकेश तिवारी को सौंपे गए हैं। जिला प्रशासन सारंगढ़-बिलाईगढ़ के माध्यम से इन दीयों को दीपावली के अवसर पर सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचाया जाएगा। सारंगढ़ के बच्चों की ओर से भेजी जाने वाली यह छोटी-सी भेंट जवानों के प्रति सम्मान, अपनापन और आभार का बड़ा संदेश देगी।

प्रियंका गोस्वामी ने कहा कि जिले की मुखिया स्वयं एक महिला हैं और नारी सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। ऐसे में प्रत्येक महिला को आगे आकर समाज के विकास में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए और अपनी प्रतिभा के माध्यम से अलग पहचान बनानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि प्रियंका गोस्वामी इससे पहले भी शून्य निवेश बजट पर शिक्षक, विद्यार्थियों और समुदाय के सहयोग से पर्यावरण हितैषी घोंसलों का निर्माण कर गौरैया बचाओ अभियान चला चुकी हैं, जिसकी आमजन ने काफी सराहना की थी। दहिदा स्कूल की यह पहल एक बार फिर साबित करती है कि छोटे-छोटे हाथों से किए गए प्रयास भी देशप्रेम और सामाजिक बदलाव की बड़ी मिसाल बन सकते हैं।

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