सनई हरी खाद से संवर रही है मिट्टी की सेहत..

सारंगढ़-बिलाईगढ़।
उप संचालक कृषि आशुतोष श्री श्रीवास्तव के दूरदर्शी नेतृत्व एवं अनुविभागीय कृषि अधिकारी श्री हरीश राठौर के कुशल मार्गदर्शन में जिले का कृषि विभाग किसानों की समृद्धि और भूमि की सेहत सुधारने के लिए निरंतर तत्परता से कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार, 21 अगस्त को बरमकेला विकासखंड के ग्राम झनकपुर में कृषि विभाग की टीम ने विशेष खेत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान
अनुविभागिय कार्यालय सारंगढ़ से विश्वनाथ कुमार बैरागी, प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री बसंत नायक एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नीलेश राव ने कृषक श्री वेणुधर नायक पिता: श्री गुदाल नायक के खेत का मुआयना किया, किसान द्वारा पूर्व मे क़ृषि विभाग की मदद से फसल का ‘बीज निगम’ में पंजीयन कराया गया है ।
खेत में ‘हैरी कैटरपिलर’ (बालदार सुंडी) का प्रकोप पाए जाने पर क़ृषि अधिकारियों ने तुरंत बचाव के उपाय सुझाए। शुरुआती अवस्था में प्रभावित पत्तियों को तोड़कर केरोसिन मिले पानी में डालने या जलाकर नष्ट करने तथा रात में लाइट ट्रैप का उपयोग करने की सलाह दी गई। प्रकोप अधिक होने पर क्लोरपायरीफॉस 20% EC या क्विनालफॉक्स 25% EC (2 मि.ली. प्रति लीटर पानी) का शाम के समय छिड़काव करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार किसान को सनई हरी खाद के प्रयोग के प्रति जागरूक किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि सनई की फसल मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती है, जिससे यूरिया की खपत 25-30% तक कम हो जाती है। 45-50 दिनों की सनई को खेत में जोतने से मिट्टी में जैविक कार्बन (ह्यूमस) की मात्रा बढ़ती है, जलधारण क्षमता सुधरती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है।
कृषि विभाग की इस त्वरित पहल, सटीक मार्गदर्शन और सनई हरी खाद के प्रति दी गई जानकारी के लिए कृषक वेणुधर नायक एवं स्थानीय ग्रामीणों ने अधिकारियों का सहदय आभार जताया।

