10-12 घंटे की बिजली कटौती से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, जेई को सौंपा ज्ञापन…

सक्ती। जिले के ग्राम पंचायत धमनी में लगातार हो रही बिजली कटौती और बिजली विभाग की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। आए दिन घंटों तक बिजली गुल रहने और मामूली हवा चलने पर भी विद्युत आपूर्ति बाधित किए जाने से परेशान ग्रामीण छपोरा विद्युत सब स्टेशन पहुंचे और जूनियर इंजीनियर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में नियमित एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही नारियारा स्टेशन से धमनी आने वाले फीडर पर एबी स्विच लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे फॉल्ट की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली बंद करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
ग्रामीणों का आरोप है कि हल्की हवा चलने या मामूली तकनीकी खराबी का हवाला देकर 10 से 12 घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। इसका सीधा असर किसानों की सिंचाई, विद्यार्थियों की पढ़ाई और ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या पर पड़ रहा है। पेयजल संकट भी गहरा जाता है, क्योंकि बिजली नहीं होने से मोटर पंप बंद हो जाते हैं और लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छपोरा विद्युत सब स्टेशन की अव्यवस्था का खामियाजा केवल धमनी ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के उपभोक्ताओं को भी भुगतना पड़ रहा है। समय पर फॉल्ट का निराकरण नहीं होने और वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में छोटी-सी तकनीकी समस्या भी घंटों की बिजली कटौती में बदल जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई, तो वे व्यापक जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जनपद सदस्य विजय केशी, युवा नेता संजय यादव, मुकुंदराम भारद्वाज, सुरेश बंजारे, राजू खूंटे, विकास कोयल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग ग्रामीणों की वर्षों पुरानी और जायज मांगों पर तत्काल कार्रवाई कर बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करेगा, या फिर उपभोक्ताओं को इसी तरह लंबी बिजली कटौती और विभागीय लापरवाही का सामना करना पड़ता रहेगा?
