सारंगढ़

“लोकतंत्र या लूटतंत्र?” बिलाईगढ़ नपं में घमासान—CMO पर गंभीर आरोप, ₹16 लाख निकासी ने मचाया बवाल…

बिलाईगढ़। नगर पंचायत बिलाईगढ़ इन दिनों जबरदस्त राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों के केंद्र में है। हर गली-मोहल्ले में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या यहां लोकतंत्र चल रहा है या फिर लूटतंत्र हावी हो चुका है?
CMO पर लगे गंभीर आरोपों ने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जनाक्रोश को भी लगातार भड़का दिया है।

परिषद बैठक नहीं—लोकतंत्र पर सवाल

चुनाव के बाद से अब तक एक भी परिषद बैठक आयोजित नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है। पार्षदों और निर्दलीय अध्यक्ष का आरोप है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जानबूझकर कमजोर करने की साजिश है।
CMO की अनियमित उपस्थिति ने भी हालात को और संदिग्ध बना दिया है।

₹16 लाख निकासी पर बड़ा सवाल

पूरा विवाद उस वक्त और गहरा गया जब होली से पहले ₹16 लाख की राशि निकाले जाने का मामला सामने आया
आरोप है कि—

बिना अध्यक्ष की अनुमति
बिना परिषद प्रस्ताव
बिना बैठक
यह राशि निकाल ली गई।


अब जनता और जनप्रतिनिधि पूछ रहे हैं—

पैसा गया कहां?

किसके आदेश पर निकाला गया?

इसका हिसाब कौन देगा?

अधूरे काम, बढ़ता खतरा

नगर में कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। सड़कों पर फैली निर्माण सामग्री से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
आरोप यह भी है कि कई कार्य कागजों में पूरे दिखाकर राशि का संदिग्ध उपयोग किया गया।

आवाज उठाने पर दमन के आरोप

निर्दलीय अध्यक्ष और पार्षदों का कहना है कि जब उन्होंने इन मुद्दों पर आवाज उठाई, तो उन्हें प्रताड़ित किया गया।
यहां तक कि SC/ST एक्ट जैसे संवेदनशील कानून के दुरुपयोग के आरोप भी सामने आए हैं।
अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला माना जाएगा।

मामला पहुंचा हाईकोर्ट और शासन तक

यह पूरा विवाद अब नगरीय प्रशासन विभाग, मंत्री और राज्यपाल तक पहुंच चुका है।
हाईकोर्ट में याचिका भी दायर हो चुकी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

“रणनीति के तहत दबाव की राजनीति?”

प्रभावित पक्ष का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें निर्दलीय नेतृत्व को कमजोर कर सत्ता पर एकतरफा कब्जा जमाने की कोशिश की जा रही है।

जनप्रतिनिधियों की प्रमुख मांगें
CMO की निष्पक्ष जांच और निलंबन

₹16 लाख की राशि का सार्वजनिक ऑडिट
अधूरे विकास कार्यों की समीक्षा
पार्षदों को न्यायिक राहत
नियमित परिषद बैठकों की बहाली
अब ये मांगें धीरे-धीरे आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही हैं।

जनता का संदेश साफ

बिलाईगढ़ की जनता अब खामोश नहीं है।
सवाल गूंज रहा है—
“सत्ता सेवा के लिए है या दमन के लिए?”
और चेतावनी भी साफ है—
अगर हालात नहीं बदले, तो अगला फैसला जनता अपने वोट से देगी।

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