32 लाख का पंचकर्म सेंटर अधर में! भविष्य पर संकट, मरीजों की बढ़ेगी परेशानी…

सारंगढ़। जिला मुख्यालय में मरीजों को बेहतर और वैकल्पिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित पंचकर्म सेंटर का भविष्य अब सवालों के घेरे में नजर आ रहा है। करीब 32 लाख रुपये की लागत से तैयार इस सेंटर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से शहर सहित आसपास के लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले ग्रामीण मरीजों की चिंता बढ़ गई है। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और निजी अस्पतालों में उपचार कराने आने वाले मरीजों के लिए यह केंद्र एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा साबित हो सकता था, लेकिन अब इसके संचालन और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति पंचकर्म शरीर को शुद्ध करने और स्वास्थ्य संतुलन बनाए रखने की एक महत्वपूर्ण उपचार प्रक्रिया मानी जाती है। इसमें विभिन्न आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं के माध्यम से वात, पित्त और कफ के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है। विशेषज्ञों की देखरेख में की जाने वाली यह चिकित्सा पद्धति कुछ मरीजों में पुराने जोड़ों के दर्द, गठिया, कमर एवं गर्दन की अकड़न और अन्य समस्याओं के प्रबंधन में सहायक हो सकती है।
इसके अलावा पंचकर्म की विभिन्न प्रक्रियाएं तनाव, अनिद्रा, मानसिक थकान तथा पाचन संबंधी समस्याओं में भी मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से अपनाई जाती हैं। हालांकि, इसका लाभ मरीज की बीमारी, शारीरिक स्थिति और चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करता है।
ऐसे में सारंगढ़ जैसे जिला मुख्यालय में पंचकर्म सेंटर का सुचारू संचालन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इस केंद्र का संचालन प्रभावित होता है या इसे अन्यत्र स्थानांतरित किया जाता है, तो स्थानीय मरीजों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। विशेषकर बुजुर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और नियमित उपचार की आवश्यकता वाले मरीजों के लिए यह परेशानी बढ़ा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये की लागत से स्थापित इस स्वास्थ्य सुविधा का भविष्य क्या होगा? क्या सेंटर को वर्तमान स्थान पर संचालित रखा जाएगा या इसके स्थानांतरण की कोई योजना है? यदि स्थानांतरण प्रस्तावित है तो मरीजों की सुविधा और पहुंच को ध्यान में रखते हुए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी?
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए पंचकर्म सेंटर के संचालन, स्थान और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि सरकारी संसाधनों से तैयार यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मरीजों के लिए उपयोगी बनी रहे।