सारंगढ़

सारंगढ़ में संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी (कमर छठ) का निर्जला व्रत…

​सारंगढ़। जिलेभर में हलषष्ठी (कमर छठ) का महापर्व अपार श्रद्धा, अटूट आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ। अपनी संतान की लंबी उम्र, निरोगी काया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर व्रती महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई भगवान बलराम की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

​सुबह से ही घरों और मंदिरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं। पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी माताओं ने सगरी बनाकर जलाशय पूजन किया और भगवान बलराम के शस्त्र ‘हल’ का स्मरण कर उनका आशीर्वाद लिया।

पं. दिनेश शर्मा ने सुनाई हलषष्ठी की महिमा

धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पंडित दिनेश शर्मा ने हलषष्ठी व्रत कथा का वाचन किया। उन्होंने पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत संतान रक्षा और परिवार की खुशहाली के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। कथा के दौरान महिलाओं ने बड़ी तल्लीनता से कथा श्रवण किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

सामूहिक भजन-कीर्तन और पारण

पूजा और कथा समापन के बाद महिलाओं ने परंपरा के अनुसार पसहर चावल व बिना जुताई की सब्जियों का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत तोड़ा। कई वार्डों और ग्रामीण इलाकों में सामूहिक भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया। इस पर्व ने पूरे सारंगढ़ जिले में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और सनातन परंपरा की एक अनूठी व अलौकिक झलक पेश की।

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