वित्त मंत्री ओपी चौधरी के दौरे से पहले सारंगढ़ में बवाल…पुलिस ने NSUI और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लिया हिरासत में..विधायक और कांग्रेसियों ने किया थाने का घेराव, काले झंडे दिखाने की दी चेतावनी…

सारंगढ़:
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी के सारंगढ़-बिलाईगढ़ दौरे से पहले क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया। मंत्री के आगमन से ठीक पहले पुलिस ने एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के दर्जनों कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया। ये कार्यकर्ता क्षेत्र की जर्जर सड़कों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी मांगों को लेकर मंत्री को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे थे।
कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की सूचना मिलते ही कांग्रेसियों में भारी आक्रोश फैल गया। सारंगढ़ की क्षेत्रीय विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े और पूर्व जिलाध्यक्ष अरुण मालाकार के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता सिटी कोतवाली थाने पहुंच गए। वहां उन्होंने पुलिस प्रशासन का घेराव करते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। भारी हंगामे के बाद तहसीलदार व पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाइश दी। इसके बाद प्रशासन ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को रिहा किया और उनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया।
7 सूत्रीय मांगों पर था जोर-
युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता सारंगढ़ क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं की ओर मंत्री का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे। उनके ज्ञापन में मुख्य रूप से सारंगढ़ के विकास, जर्जर सड़कों की मरम्मत, कॉलेज भवनों के निर्माण और जर्जर स्कूलों की स्थिति सुधारने जैसी 6 से 7 सूत्रीय मांगें शामिल थीं।
सारंगढ़ के साथ हो रहा पक्षपात-
इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेताओं ने सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए।
पूर्व जिलाध्यक्ष अरुण मालाकार ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ओपी चौधरी सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों में भेदभाव कर रहे हैं और उनका पूरा ध्यान केवल अपने क्षेत्र (सरिया/रायगढ़) पर केंद्रित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगे से मंत्री सारंगढ़ आते हैं, तो कांग्रेस पार्टी उन्हें काले झंडे दिखाएगी।
विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े ने प्रशासन की कार्रवाई को अन्यायपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि युवा कार्यकर्ता अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि सारंगढ़ की जनता, बुनियादी ढांचे और शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के लिए लोकतांत्रिक तरीके से मांग रख रहे थे, जिसे प्रशासन ने बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया।