डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव की पहल: मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता का दिया संदेश…

भटगांव। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को तनाव, चिंता व डिप्रेशन जैसी समस्याओं के प्रति सचेत करने का संदेश दिया गया। डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव के नाम से सामने आए इस जागरूकता संदेश में मन की सेहत को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण बताते हुए लोगों से अपनी मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय समय पर मदद लेने की अपील की गई।
संदेश में बताया गया कि अक्सर लोग ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय रोग जैसी बीमारियों को गंभीरता से लेते हैं, लेकिन मानसिक परेशानी को गलतफहमी के कारण छिपाते रहते हैं। तनाव, चिंता और अवसाद किसी को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना और पीड़ित व्यक्ति को सहयोग देना बेहद जरूरी है।
खेती में नुकसान, कर्ज का दबाव, बेरोजगारी, अकेलापन, नशे की लत, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग और पर्याप्त नींद नहीं लेना मानसिक तनाव के प्रमुख कारण बन सकते हैं। लंबे समय तक शुगर और बीपी जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना और खुद को कमतर समझना भी तनाव बढ़ा सकता है।
संदेश में लोगों से मानसिक परेशानी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की गई। यदि दो सप्ताह से अधिक समय तक उदासी बनी रहे, किसी काम में मन न लगे, नींद और भूख में बदलाव आए, लगातार थकान महसूस हो, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आए या खुद को बेकार समझने की भावना बढ़ने लगे, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। खुद को नुकसान पहुंचाने या जीवन समाप्त करने के विचार आने पर तत्काल सहायता लेना बेहद जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए परिवार के सदस्यों से खुलकर बातचीत करना, प्रतिदिन पर्याप्त नींद लेना, सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना, नियमित पैदल चलना, योग-प्राणायाम करना और नशे से दूर रहना उपयोगी उपाय हैं। साथ ही काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखने, मोबाइल-टीवी का समय सीमित करने तथा पौष्टिक आहार लेने पर भी जोर दिया गया।
इस जागरूकता संदेश की खास बात यह है कि मानसिक बीमारी को कमजोरी या शर्म का विषय मानने के बजाय एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखने की अपील की गई, जिसका उचित परामर्श और उपचार संभव है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से भी सहायता ली जा सकती है। जरूरत पड़ने पर नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) या जिला अस्पताल में संपर्क कर परामर्श और उपचार की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
परिवार और समाज की भूमिका पर जोर देते हुए संदेश में कहा गया कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को ताने मारने, दोष देने या अकेला छोड़ने के बजाय उसकी बात सुननी चाहिए और उसे सहयोग देना चाहिए। समय पर पहचान, संवेदनशील व्यवहार और उचित उपचार से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है।
“मन की बात कहो, तनाव दूर करो” का संदेश देते हुए डॉ. एफ. आर. निराला ने भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। समग्र संदेश यही है कि मन की परेशानी को छिपाना नहीं, बल्कि उसे समझना और समय पर सहायता लेना ही स्वस्थ जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।