किडनी की बीमारी कैसे दिल के लिए बन जाती है खतरा? जानें ऐसा क्यों होता है?

शरीर का वो अंग है जो टॉक्सिन्स-एक्स्ट्रा वाटर को बाहर निकालने और खून को साफ करने का काम करती है. इसके अलावा ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी इसका रोल है. लेकिन अगर इसकी सेहत ठीक न हो तो चीजें काफी बिगड़ सकती है.
अगर किडनी की हेल्थ ठीक नहीं है तो ये ठीक से काम नहीं कर पाती है और बॉडी में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं. इस कंडीशन में हमारी दिल की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है. डॉ. अमर सिंघल (डायरेक्टर – इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट दिल्ली) का कहना है कि किडनी और दिन दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए अंग है.
किडनी की खराब सेहत से दिल कैसे कमजोर पड़ता है ये बहुत कम लोग जानते हैं. लोग किडनी को ठीक रखने पर फोकस करते हैं लेकिन दिल की सेहत बिगड़ रही है इस पर ध्यान बहुत देर में जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे क्रोनिक किडनी डिजीज का दिल पर भी बुरा असर पड़ता है.
किडनी की बीमारी का दिल पर असर
डॉक्टर सिंघल कहते हैं कि जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में अतिरिक्त पानी, नमक और विषैले तत्व जमा होने लगते हैं. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लंबे समय तक ऐसा रहने पर हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.
किन लोगों पर ज्यादा खतरा
इसके अलावा किडनी की बीमारी से शरीर में खून की कमी (एनीमिया), मिनरल्स का असंतुलन और सूजन भी हो सकती है, जो दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं. इसलिए जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की समस्या है, उन्हें नियमित रूप से किडनी और दिल दोनों की जांच करानी चाहिए.
किडनी की बिगड़ी सेहत के लक्षण
एक्सपर्ट कहते हैं कि जब किडनी की सेहत ठीक नहीं होती तो शरीर में पैर-चेहरे पर सूजन, बार-बार या कम यूरिन आना, यूरिन में झाग-खून आना और कम भूख लगने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं. इसके अलावा शरीर में खुजली और हाई बीपी भी होने लगता है. शुरू में लक्षण नजर नहीं आते हैं इसलिए इसे साइलेंट डिजीज भी कहा जाता है. डॉ. के मुताबिक रोजमर्रा की कुछ आदतें हैं जो किडनी की हेल्थ को बिगाड़ सकती है. स्मोकिंग, पेन किलर ज्यादा खाना और पूरे दिन ठीक से पानी न पीने जैसी आदतें किडनी को बीमार बनाती हैं.
इन बातों का रखें खास ध्यान
डॉ. सिंघल कहते हैं कि समय पर इलाज, संतुलित खानपान, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेने से दोनों अंगों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है.
खानपान में ऐसी चीजें खाएं जिनमें फाइबर ज्यादा हो और ये बॉडी को हाइड्रेट भी कर पाएं.
दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पिएं. इसके अलावा ऐसी फल-सब्जियां खाएं जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो.