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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से पाएं तप, ज्ञान और मनोवांछित फल! जानें विधि, मंत्र और आरती…

चैत्र नवरात्रि

के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. जहां पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है, वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है.

चैत्र नवरात्रि के मौके पर हम आपको मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दे रहे हैं.

मां दुर्गा का दूसरा अवतार देवी ब्रह्मचारिणी तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी हैं. माता को सफेद रंग के वस्त्र, चंदन, फूल और श्वेत मिठाई चढ़ाया जाता है. इस दिन का काफी खास महत्व है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है. आइए जानते हैं उनके मंत्र, पूजा विधि, कथा और आरती से जुड़ी सटीक जानकारी के बारे में.

मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ?

मां ब्रह्मचारिणी तप शक्ति का प्रतीक हैं. ब्रह्मचारिणी माता की आराधना से भक्तों में तप की शक्ति बढ़ती है. इसके अलावा उन्हें मनोवांछित फल की भी प्राप्ति होती है. देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से दूसरे स्वरूप का नाम देवी ब्रह्मचारिणी है. नवरात्रि के दूसरे दिन के दौरान मां के इस अवतार की पूजा संपूर्ण विधि-विधान से करनी चाहिए.

‘ब्रह्मचारिणी’ नाम का मतलब ब्रह्म और चारिणी से मिलकर बना हुआ है. ब्रह्म का अर्थ है तप या तपस्या, वही चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली. ऐसे में ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ है, तप का आचरण करने वाली देवी.

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए मां ने इस रूप में कठोर तपस्या की थी.

नवरात्र के दूसरे दिन खास योग!

चैत्र नवरात्रि के दूसरे सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो शुक्रवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर देर रात 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही शनिवार दोपहर2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक विजय मुहूर्त का संयोग बन रहा है.

धार्मिक मान्यता है कि, सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए काम सफल होते हैं और राहुकाल में कोई नया काम या पूजा करने से वह निष्फल होता है.

मां ब्रह्माचारिणी की पूजा विधि

नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद आसन पर बैठकर मां का ध्यान करते हुए पूजा करें. उन्हें फूल, चंदन, अक्षत, रोली, धूप, भोग आदि अर्पित करें.

मां ब्रह्मचारिणी को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं. उसके बाद मां को उनका पसंदीदा भोग अर्पित करें. उन्हें पान, सुपारी, लौंग अर्पित करना शुभ माना जाता है.

मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ा ध्यान मंत्र

या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू।

देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

इस मंत्र का अर्थ है कि, देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप दिव्यता से भरा है. माता के दाहिने हाथ में जप की माला तो बाएं हाथ में कमंडल है.

माता ब्रह्मचारिणी की आराधना करने के लिए ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए.

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग

नवरात्र के दूसरे मां ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग शर्करा या गुड़ अर्पित करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से आयुष्मान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

ब्रह्मचारिणी माता जी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti)

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता।

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए।

कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने।

जो तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर।

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना।

मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

रखना लाज मेरी महतारी।आरती करते समय खासतौर पर इस बात का ध्यान दें कि, देवी-देवताओं की 14 बार आरती उतारना है. 4 बार उनके चरणों पर से, 2 बार नाभि पर से, 1 बार मुख पर से और 7 बार पूरे शरीर पर से. आरती की बत्तियां 1, 5, 7 यानी विषम संख्या में ही बनाकर आरती करनी चाहिए.

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