महिला सहायता समूहों की हर महिला को 10 हजार रुपये नकद.. 1 अप्रैल से बैंक खातों में आएगी राशि, जानें इस योजना के बारें में…

असम सरकार 1 अप्रैल से मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (एमएमयूए) के तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) की प्रत्येक महिला को 10,000 रुपये वितरित करने जा रही है।
पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री रंजीत कुमार दास ने बुधवार को बताया कि असम सरकार राज्य की 30 लाख महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाने की दिशा में प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों, युवाओं, महिलाओं और किसानों के उत्थान को प्राथमिकता देने की बात कही थी, और इसी दिशा में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार प्रयास कर रहे हैं।
30 लाख महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना
राज्य में लगभग 40 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHG) में जुड़ी हुई हैं। सरकार का लक्ष्य 30 लाख महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत, यदि एक महिला प्रति माह 8,000 रुपये कमाती है, तो वह सालाना 1 लाख रुपये की आय अर्जित कर सकेगी।
रंजीत कुमार दास ने बताया कि यदि 30 लाख महिलाएं 1 लाख रुपये वार्षिक कमाने लगेंगी, तो यह कुल मिलाकर 30,000 करोड़ रुपये का आर्थिक योगदान होगा, जिससे राज्य की GDP को मजबूती मिलेगी।
योजना के तीन चरण
योजना के तहत प्रत्येक महिला को 10,000 रुपये की राशि दी जाएगी। इसके बाद महिलाओं को 25,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी, जिसमें राज्य सरकार 12,500 रुपये देगी और शेष 12,500 रुपये बैंक लोन के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे जबकि तीसरे और आखिरी चरण में सरकार हर महिला को 50,000 रुपये देने की योजना बना रही है, जिससे वे अपने स्वरोजगार और व्यवसाय को और सशक्त बना सकें।
असम सरकार का अब तक का सबसे बड़ा स्वरोजगार अभियान
मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (MMUA) असम में अब तक की सबसे बड़ी स्वरोजगार योजना है। वित्त मंत्री अजंता नियोग ने 2025-26 के राज्य बजट में घोषणा की थी कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में 30 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2 लाख महिलाओं को 10,000 रुपये की उद्यमिता निधि प्रदान करेगी। इस निधि के सफल उपयोग पर बैंक लिंकेज के माध्यम से 25,000 रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना को 1 अप्रैल से बेहाली विधानसभा क्षेत्र से शुरू किया जाएगा, और इसके सफल कार्यान्वयन के लिए असम सरकार कुल 3,038 करोड़ रुपये खर्च करेगी।